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प्राचीन भारत का इतिहास – Ancient Indian History PDF Notes Download in Hindi

Indian Ancient History GK-India
Written by gkindia

प्राचीन भारत इतिहास विशाल और धार्मिक धरोहर के साथ भरपूर है, जो कई हजार वर्षों तक विकसित हुआ। यह इतिहास विभिन्न कालों, सभ्यताओं और विकास के अवसरों का परिचय देता है। प्राचीन भारत इतिहास के निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ और काल:

  1. सिंधु-सरस्वती सभ्यता (3300-1300 ईसा पूर्व): यह भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता सिंधु और सरस्वती नदी क्षेत्र में विकसित हुई थी और वे बौद्धिक और सांस्कृतिक दृष्टि से प्रसिद्ध थे।
  2. वेदिक युग (1500-600 ईसा पूर्व): इस काल में वेदों का संग्रह हुआ और धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं की नींव रखी गई।
  3. महाजनपदों का काल (600-300 ईसा पूर्व): इस काल में भारत में विभिन्न महाजनपद बने, जैसे कि मगध, कोसल, वत्स, अवंति आदि।
  4. बौद्ध और जैन धर्म के उदय (6-5 ईसा पूर्व): गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने नए धार्मिक आदर्शों की स्थापना की, जिनका अनुयायियों के बीच व्यापारिक और सामाजिक स्थिति में मदद मिली।
  5. मौर्य राजवंश (322-185 ईसा पूर्व): चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक और उनके बाद के शासकों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप का विशाल साम्राज्य स्थापित किया गया। अशोक द्वारा शांति की प्रोत्साहना और बौद्ध धर्म के प्रसार का प्रयास किया गया।
  6. गुप्त राजवंश (320-550 ईसा): गुप्त साम्राज्य ने भारतीय सांस्कृतिक जीवन में उन्नति की और गुप्त साम्राज्य को ‘सोने की युग’ के रूप में जाना जाता है।
  7. हुनों का आक्रमण (6-7 वीं सदी): हुन साम्राज्य के आक्रमण के कारण भारतीय सभ्यता पर भारी प्रभाव पड़ा और विभिन्न क्षेत्रों में उपनिवेशित हो गए।
  8. गुप्त साम्राज्य के द्वारा अद्भुत सांस्कृतिक उन्नति (4-6 वीं सदी): इस काल में भारतीय विज्ञान, कला, साहित्य और गणित में अद्वितीय प्रगति हुई।
  9. चोल राजवंश (9-13 वीं सदी): तमिलनाडु क्षेत्र में चोल राजवंश ने बौद्धि, जैन और हिन्दू संस्कृति को प्रोत्साहित किया और व्यापार में उन्नति की।

यह कुछ महत्वपूर्ण कालों का संक्षिप्त परिचय है जो प्राचीन भारत के इतिहास का हिस्सा हैं। यह समय विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक परिवर्तनों की शुरुआत थी, जो आज के भारतीय समाज और संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन (Sources of information on ancient Indian history)

प्राचीन भारतीय इतिहास, भारतीय subcontinent के विकास, संस्कृति और सभ्यता की उत्थान-पतन की कहानी है। यह इतिहास लगभग 5000 वर्षों तक का समय आवर्क्षित करता है और इसके दौरान विभिन्न समाज, धर्म, राजनीति, विज्ञान और कला के क्षेत्र में विकास हुआ। प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त होते हैं:

पुराण: पुराणों में प्राचीन भारतीय समाज, संस्कृति, राजनीति, धर्म आदि के बारे में विस्तृत विवरण दिए गए हैं। विष्णु पुराण, शिव पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, भागवत पुराण आदि प्रमुख पुराण हैं।

इतिहासिक लेखकों की रचनाएँ: चाणक्य, कालिदास, पाणिनि जैसे लेखकों ने भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं के बारे में अपनी रचनाएँ छोड़ी हैं।

अर्थशास्त्र: आर्थशास्त्र ग्रंथों में भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और वाणिज्य के पहलु दिए गए हैं। चाणक्य की “अर्थशास्त्र” एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

शिलालेख: प्राचीन भारतीय सम्राटों और साम्राज्यों के शिलालेख उनके काल, साम्राज्य और सामाजिक जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

धार्मिक ग्रंथ: वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद गीता आदि धार्मिक ग्रंथ प्राचीन भारतीय समाज, धर्म और संस्कृति की जानकारी प्रदान करते हैं।

इस संदर्व में विस्तृत जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें


प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Times)

प्रागैतिहासिक काल वह काल है जिसमें लिखित रूप से कोई ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं मिलते हैं, लेकिन इंसानों और उनके समाज के विकास के अवशेष मिलते हैं। इस काल को उस समय से संदर्भित किया जाता है जब मानव आदि ने लिखित भाषा का उपयोग शुरू नहीं किया था। इस समय की जानकारी हमें अधिकतर आवश्यकताओं के लिए उपकरणों, चित्रकला, शिलालेखों, शवों, आदि के आधार पर मिलती है। प्रागैतिहासिक काल मानव सभ्यता के विकास की प्रारंभिक अवधि को दर्शाता है, जो स्वतंत्र रूप से अपने प्राकृतिक आस-पास के वातावरण में अपने जीवन को बिताते थे।

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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization)

सिंधु-सरस्वती सभ्यता (Indus Valley Civilization) एक प्राचीन सभ्यता थी जो लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक विकसित हुई थी। यह सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी हिस्से में स्थित सिन्धु और सरस्वती नदी क्षेत्र में विकसित हुई थी। इस सभ्यता की खोज 1920 में हुई थी और इसके उपनगरों की खोज पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान के क्षेत्र में की गई है। सिंधु-सरस्वती सभ्यता के सबूत विभिन्न स्थलों पर पाए गए हैं, जिनमें मोहेंजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल, दोलावीरा आदि शामिल हैं। यह सभ्यता उस समय की विशेषताओं और तकनीकियों का प्रतिनिधित्व करती है जो उस युग में विकसित हुआ था।

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वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization)

वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization), जिसे वेदों की उपदेशना और मार्गदर्शना ने आदान-प्रदान किया था, भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुई थी। यह सभ्यता प्राचीन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण भाग है और वैदिक जीवन प्रणाली, धर्म, संस्कृति और साहित्य की एक प्रमुख स्रोत है। वैदिक सभ्यता के विकास के दौरान वेदों के ग्रंथों का निर्माण हुआ, जो समृद्धि और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान करते थे।

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महाजनपद (Mahajanapada)

भारतीय इतिहास में महाजनपद वह प्राचीन राज्यों का समूह था जो वैदिक सभ्यता के बाद और मौर्य साम्राज्य की स्थापना से पहले के काल में विकसित हुआ था। यह कालगत संकेत के रूप में 6वीं से 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक माना जाता है। यह अवधि आमतौर पर 6वीं से 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व के बीच मानी जाती है और भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण गतिविधियों की निश्चित जानकारी प्रदान करती है। यह वो समय था जब समाज में विभिन्न वर्गों का उदय हुआ और राजनीतिक संरचनाओं की प्रारंभिक रूपरेखा बन रही थी।

महाजनपद क्या और कितने थे, इसकी विशेषता आदि की जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें


जैन धर्म (Jainism)

जैन धर्म भारतीय संस्कृति के अद्वितीय रूपरेखा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस धर्म का मूल मार्गदर्शन महावीर स्वामी के उपदेशों और उनके आदर्शों पर आधारित है। जैन धर्म के सिद्धांतों में अहिंसा, अनेकांतवाद, और अपरिग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है। जैन धर्म न केवल आत्म-साक्षात्कार की दिशा में मार्गदर्शन करता है, बल्कि यह प्राणियों के प्रति करुणा, अहिंसा, और समरसता की महत्वपूर्ण शिक्षाएं भी प्रदान करता है।

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बौद्ध धर्म (Buddhism)

बौद्ध धर्म (Buddhism) भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी उत्पत्ति गौतम बुद्ध के उपदेशों पर आधारित है। यह एक धार्मिक और दार्शनिक आदर्श है, जिसके अनुयायी ‘बौद्ध’ कहलाते हैं। यह धर्म ज्ञान और सहानुभूति की दिशा में मार्गदर्शन करता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों को ‘बौद्ध’ कहा जाता है। बौद्ध धर्म का मुख्य उद्देश्य दुःख से मुक्ति प्राप्त करना है। बुद्ध के अनुसार, दुःख की असली वजह आविद्या (अज्ञान) है, और मोक्ष उसे दूर करके प्राप्त किया जा सकता है।

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शैव धर्म (Shaivism)

शैवधर्म, भारतीय धार्मिक परंपरा में से एक, शिव की पूजा और उपासना पर आधारित है। यह धार्मिक सिद्धांत शिव को सर्वोच्च देवता मानता है और उनके महत्व को मानवता के जीवन के हर क्षेत्र में एक मार्गदर्शन के रूप में ग्रहण करता है। शैवधर्म के मूल तत्वों में पंचभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिन्हें पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” से प्रतिष्ठित किया गया है। शैवधर्म में त्रिमूर्ति का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) शामिल होते हैं। शिव को सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च माना जाता है जो सृष्टि, संरक्षण और संहार के त्रितीय अस्तर का प्रतीक है।

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वैष्णव धर्म (Vaishnavism)

वैष्णवधर्म, भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह धर्म विष्णु भगवान की भक्ति पर आधारित है और उसके विभिन्न अवतारों की मान्यता को महत्वपूर्ण मानता है। वैष्णवधर्म में भगवान विष्णु की पूजा और उपासना महत्वपूर्ण होती है। उनके विभिन्न अवतारों में से कृष्ण और राम की उपासना विशेष रूप से की जाती है। वैष्णवधर्म का पालन करने वाले लोग विष्णु के भक्त के रूप में अपनी उपासना करते हैं और उनके आदर्शों का पालन करने का प्रयास करते हैं।

वैष्णवधर्म में भक्ति के पांच मार्ग होते हैं – साक्षात्कार (दिव्य अनुभव), वत्सल्य (माता-पिता की भावना), सेवा (सेवा और समर्पण), दास्य (दास की भावना), और साख्य (मित्र की भावना)।

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इस्लाम धर्म (Islam religion)

इस्लाम एक प्रमुख अब्राहमी धर्म है, जो अपने विश्वासों, आदर्शों, और सामाजिक मूल्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह धर्म एक केंद्रीय विश्वास में एकईश्वरवाद (एक ही ईश्वर की उपासना) की ओर पुष्टि देता है और अपने अनुयायियों को जीवन की नियमों और नैतिकता की मार्गदर्शन करता है। इस्लाम में मुख्य विश्वासों में से पहला है ‘कलमा’ – “ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह” जिसका अर्थ है “कोई ईश्वर नहीं सिवाय अल्लाह के, मुहम्मद उनके पैग़म्बर है।”कुरान, इस्लाम की प्रमुख पवित्र पुस्तक है जिसमें मानवता के लिए दिशा-निर्देश, नैतिकता, और आदर्शों की बातें दी गई हैं।

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ईसाई धर्म (Christianity)

ईसाई धर्म, जिसे यीशु मसीह की उपदेशों और उनके जीवन की कथाओं पर आधारित माना जाता है, विश्व के सबसे बड़े धर्मों में से एक है। यह धर्म उस समय शुरू हुआ, जब ईसा मसीह का जन्म हुआ था, जिन्हें ईसाई धर्म के अनुयायी मसीही कहते हैं। ईसाई धर्म के मूल शिक्षाओं में प्रेम, सहानुभूति, दया और धर्मिकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह मानता है कि यीशु मसीह मनुष्यों के पापों को मिटाने के लिए अपने जीवन की बलिदानी मृत्यु कर गए थे और उनकी उपदेशों का पालन करके लोग दिव्यता और मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।

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पारसी धर्म (Zoroastrianism)

जरूश्त्री धर्म (Zoroastrianism) एक प्राचीन मजहब है जो परसी समुदाय के प्रमुख धार्मिक प्रथाओं में से एक है। यह धर्म पर्सियन धर्म के रूप में भी जाना जाता है और इरान के प्राचीन धार्मिक शिल्पकला और ग्रंथों में दर्शाया गया है। इसके संस्थापक जरथुष्ट्रा (Zarathustra) या जरूस्ष (Zoroaster) थे और उनका धार्मिक शिक्षा और विचारधारा उनके द्वारा लिखित ग्रंथों में प्रकट होता है, जिनमें ‘अवेस्ता’ सबसे महत्वपूर्ण है।

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मगध राज्य का उत्कर्ष, हर्यक वंश, शिशुनाग वंश, नन्द वंश (The rise of Magadha state, Haryak dynasty, Shishunaga dynasty, Nanda dynasty)

मगध एक प्राचीन राज्य था जो भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी हिस्से में स्थित था। यह प्राचीन भारत की राजनीतिक प्रस्तावना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। मगध की उच्चता के पीछे कारण उसके रणनीतिक भूगोलिक स्थिति, उर्वर भूमि और प्राचीन नगरीकरण जैसे कारक थे। यह धीरे-धीरे सैन्य विजयों और राजनीतिक संघर्षों के माध्यम से अपनी सीमाएँ बढ़ाता गया। संक्षेप में, मगध की उच्चता का क्रमिक रूप से हार्यक, शिशुनाग और नंद वंशों द्वारा शासन किया गया था। ये वंश ने मगध की सीमाएँ, राजनीतिक प्रभाव और प्राचीन भारत में महत्वपूर्ण साम्राज्यों की उत्पत्ति की राह बनाई।

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सिकन्दर महान (Alexander the great)

अलेक्जेंडर द ग्रेट (Alexander the Great) एक प्रसिद्ध यूनानी सेनानायक और साम्राज्य विस्तारक थे। उन्हें अलेक्जेंडर महान भी कहा जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में विशाल साम्राज्य की स्थापना की और बहुत से क्षेत्रों को जीतकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाई। उनकी प्रमुख विजयें इंडिया, पर्सिया, एजिप्ट और बीटिस का समृद्धि क्षेत्र शामिल थे। अलेक्जेंडर की मृत्यु उनकी युवावस्था में ही हो गई, लेकिन उनका प्रभाव इतिहास में अद्वितीय है और उन्हें एक महान योद्धा और यात्री के रूप में याद किया जाता है।

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मौर्य काल (Mauryan period)

मौर्य साम्राज्य, भारतीय इतिहास का एक प्रमुख शासनकाल था जो चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित किया गया था। यह साम्राज्य करीब 322 ईसा पूर्व से लेकर 185 ईसा तक भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी प्रभुता की चरम सीमाओं तक फैला था। मौर्य साम्राज्य का गठन पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना, बिहार) को अपनी राजधानी बनाकर किया गया था। मौर्य साम्राज्य का विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों तक हो गया और यह एक समृद्धि और प्रगति के दौर में था। अंततः, मौर्य साम्राज्य के अंतर्गत संकट और आंशिक विघटन के कारण साम्राज्य की प्रभावस्थली अलग-अलग राजवंशों के हाथों में चली गई।

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पुष्यमित्र शुंग (Pushyamitra Sunga)

पुष्यमित्र शुंगा एक प्रमुख भारतीय राजा थे जो मौर्य राजवंश के अंत के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में शुंग वंश की स्थापना की। वे गुप्त साम्राज्य के संस्थापकों में से एक माने जाते हैं। पुष्यमित्र शुंगा का उल्लेख भारतीय इतिहास में खासकर मौर्य साम्राज्य के महान शासक अशोक के बाद के समय में होता है। उन्होंने मौर्य वंश की सत्ता को परास्त कर उनके साम्राज्य को समाप्त किया और शुंग वंश की शुरुआत की।

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भारत के यवन राज्य (Yavana states of India)

भारतीय इतिहास में, यवन शब्द यूनानी यानी ग्रीक लोगों को संकेत करता है, जिन्होंने प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप में अपने राज्य स्थापित किए थे। यह यवन राज्य मुख्य रूप से पश्चिमी भारत में स्थित थे और उनकी राजधानी धार्मपट्टणम (सुरत) थी। यवन राज्यों का काल इतिहास के विभिन्न पीरियड में फैला हुआ था, जिनमें मुख्य रूप से मौर्य, शुंग, कुषाण और गुप्त साम्राज्यों के काल शामिल हैं।

यवन राज्यों के आगमन का कारण भारतीय उपमहाद्वीप के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रबल होना था। ग्रीक यात्री और लोगों का उपमहाद्वीप में आगमन भी होता रहा था, जिससे उनका भारतीय समाज में प्रभाव दिखाई देता है।

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शक वंश (Shaka dynasty)

भारतीय इतिहास में शक वंश एक महत्वपूर्ण राजवंश था जिसने पश्चिम भारत में अपना शासन स्थापित किया था। यह वंश प्राचीनकाल में बहुतायत में शक जाति के लोगों द्वारा आवास किए जाने के कारण इसका नाम शक वंश पड़ा। इस वंश के शासकों का काल प्राचीन भारतीय इतिहास के अंतर्गत आता है, मुख्य रूप से 2वीं से 4वीं सदी तक।

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कुषाण वंश (Kushan dynasty)

भारतीय इतिहास में कुषाण वंश महत्वपूर्ण राजवंश था जो प्राचीन काल में महान साम्राज्य स्थापित करने में सफल रहा। यह वंश मुख्य रूप से 1वीं से 3वीं सदी तक विकसित हुआ था और उनका क्षेत्रीय व्यापारिक और सांस्कृतिक क्षेत्र बहुत विस्तृत था। कुषाण वंश के प्रमुख शासक कुजुलु कदफिस थे, जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में विस्तार किया और उनका साम्राज्य पूर्व में चीन से पश्चिम में इरान तक फैला था। उन्होंने गुप्त वंश के शासक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के खिलाफ युद्ध भी लड़ा था।

कुषाण वंश के शासक, कनिष्क के समय में हुए महत्वपूर्ण कार्य, कुषाण वंश का पतन आदि के संदर्व में अधिक जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें


सातवाहन वंश (Satavahana dynasty)

भारतीय इतिहास में सातवाहन राजवंश महत्वपूर्ण राजवंशों में से एक था, जो दक्षिण भारत में २वीं सदी से ३वीं सदी तक शासन करता रहा। यह वंश सातवाहनी नामक शूद्र वर्ग से उत्पन्न हुआ था और उन्होंने दक्षिण भारतीय इतिहास को महत्वपूर्ण योगदान दिया। सातवाहन राजवंश के शासकों का मुख्य क्षेत्र दक्षिण भारत था, जिनमें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक शामिल थे। इस वंश के शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी (सातवाहन) के शासनकाल में यह राजवंश अपने शक्ति के उच्चतम शिखर पर था।

सातवाहन वंश के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य को जानने के लिए PDF डाउनलोड करें


गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire)

भारतीय इतिहास में गुप्त साम्राज्य महत्वपूर्ण राजवंशों में से एक था, जिसने प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। यह साम्राज्य 4वीं से 6वीं सदी तक अपनी शासकीय स्थापना को बनाए रखने में सफल रहा। गुप्त साम्राज्य के प्रमुख शासक थे चंद्रगुप्त गुप्त और समुद्रगुप्त। इन शासकों ने अपने शासनकाल में भारतीय समाज और संस्कृति को समृद्धि की दिशा में नेतृत्व प्रदान किया।

गुप्त साम्राज्य के जानकारी के स्त्रोत, गुप्तकालीन प्रशासन, गुप्त साम्राज्य का पतन आदि के संदर्व में अधिक जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें


पुष्यभूति वंश (Pushyabhuti dynasty)

पुष्यभूति वंश भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण राजवंशों में से एक था, जो 6वीं से 7वीं सदी तक उत्तर भारत में शासन करता रहा। यह वंश मुख्य रूप से तुगलक वंश के उत्तराधिकारी राजवंश था और उन्होंने भारतीय समाज और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पुष्यभूति वंश के शासकों का क्षेत्रीय क्षेत्र उत्तर भारत था, जिनमें विभिन्न प्रान्त शामिल थे। इस वंश के शासकों ने अपने काल की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में योगदान किया।

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दक्षिण भारत के राजवंश (dynasties of south india)

भारतीय इतिहास में, दक्षिण भारत में भी कई महत्वपूर्ण राजवंश उत्तराधिकारी रूप में आए जिन्होंने दक्षिण भारतीय समाज और संस्कृति को विकसित किया और प्रभावित किया। चोल वंश, चेर वंश, पांड्य वंश, छालुक्य वंश, राश्ट्रकूट वंश ये राजवंश दक्षिण भारत में विभिन्न क्षेत्रों में विकास और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ सामाजिक और आर्थिक उन्नति की दिशा में योगदान किया।

दक्षिण भारत के राजवंश के विस्तृत जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें

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